चेहरे का लकवा : एक आम बीमारी

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चेहरे का लकवा एक आम बीमारी है | किसी भी उम्र, आय व वर्ग के लोग कभी भी इसके शिकार हो सकते हैं| पुरुष और महिलयों का भी कोई भेद नहीं होता | यूँ तो हर रोग का संबंध मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता से होता है| जब चेहरा ३० % लकवा ग्रस्त हो तो इसे आंशिक और ७० % होने पर संपूर्ण माना जाता है| अंतिम अवस्था में उपचार बहुत लंबा और खर्चीला होता है| एक शोध के मुताबिक ६३ % मामले में चेहरा का दायां हिस्सा इससे प्रभावित पाया गया है| एक अन्य शोध में प्रति १००० की दर से २० साल तक के लोगों का % ०.१ और इससे अधिक ८० साल तक के लोगों में यह % ०.६ पाया गया है| इस प्रभाव से रोगी को जो तकलीफ़ होती है उनमे प्रमुख हैं – भावों का शिथिल होना, ललाट क्षीण, कमज़ोर दिखना, झुर्रियाँ आना, मुरझाया हुआ चेहरा, आँखें बंद करने में परेशानी अनुभव करना| होठों का पूरी तरह बंद ना होना, खाना चबाने में परेशानी होना, चेहरा की माषपेशियों में क्षय होना आदि| एक तिहाई माले में अक्सर आँसू बहना और कम सुनने की समस्या भी देखी जाती है|

शोध में यह भी पाया गया है की मधुमेह, जुल्पत्ति, ब्रेन ट्यूमर, नर्व मसल्स की कमज़ोरी, वायरल इन्फेक्षन अथवा कुछ महिलयों को यह गर्भावस्था में यह रोग घेर लेता है| इस रोग से बचने के लिए तीन घंटे से तीन दिन के भीतर उपचार होना चाहिए| अन्यथा ये स्थाई समस्या हो जाती है| प्रारंभिक अवस्था में उपचार शुरू हो जाए तो १० दिन से १० माह तक का वक्त लग सकता है| इसमें प्रेदिनीसोंन, एसीक्लोवेर जैसी कुछ दवाईयाँ रोगी की उम्र, कद- काठी, प्रभावित क्षेत्र के मुताबिक दी जाती है| बच्चों को उनके वजन के मुताबिक (प्रति किलो १ मिली ग्राम) दवा की खुराक देनी पड़ती है| इस रोग के संबंध में नेक और उचित सलाह तो यही है की प्रभावित होने के तुरंत बाद एक्सपर्ट डॉक्टर से चिकित्सा कराएँ| तभी इसे भगाया जा सकता है|

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