क्यूँ ज़रूरी है पका हुआ भोजन

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पोषाहार विशेषज्ञ यदि कच्चे भोजन को स्वास्थ्य के लिए बेहतर बतातें हैं तो फिर हम खाना पकाने में इतना वक़्त क्यूँ बर्बाद करतें हैं? इसका स्पष्ट उत्तर है – अच्छी तरह पका और खूबसूरत ढंग से परोसा गया खाना हम अधिक पसंद करतें हैं|

भोजन पकाने के कई कारण हैं| पहला यह है कि पकाने से भोजन में जीवंश नष्ट हो जाते हैं जिनके कारण टायफाइड, हैजा और पीलिया जैसी बीमारियाँ होती हैं| खाना पकाने से पहले भोज्य पदार्थों को धोने से उसकी गैर ज़रूरी चीज़े धुल जातीं हैं| भोजन के हानिकारक जीवाणुयों को मारने का यह सबसे अच्छा तरीका है कि उन्हे प्रेशर कुकर या भाप में पकाया जाए| यदि प्रेसर कुकर ठीक ढंग से काम करे तो उसके अंदर का तापमान १२१.५ डिग्री सेल्सियस होना चाहिए जिससे हमारे भोजन के हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं|

उबालना एक अन्य प्रक्रिया है जिससे हमारा भोजन और पेयजल जीवाणुरहित हो जाता है| पीने के पानी को कम से कम १० मिनट तक उबालना चाहिए क्यूंकी तभी उसके कीटाणु नष्ट होटें हैं| लेकिन दुर्भाग्यवश उबलने से बॅक्टीरिया के बीजानूं नष्ट नही होते हैं और मौका मिलते ही वो दुबारा पनपने लगटें हैं| इसलिए भोजन और पानी को उबालने व पकाने के बाद ठंडी जगह पर ढक के रखना चाहिए|

खाना पकाने की एक अन्य वजह यह है कि इससे भोजन के पचने में आसानी होती है| भोजन को गर्म करने की कोशिश मेन उसकी दीवारें फट जाती हैं, जिससे वह पेट के अंदर आसानी से पच जाता है| इसकी सबसे अच्छी मिसाल मसालों को भुनना है| मसाले को भूनने से “चोलाइन” नामक एक ऐसा तत्व निकलता है जो शशीर की कोशिकाओं और विशेष रूप से स्नायु के निर्माण एवं कार्य करने के लिए ज़रूरी है| यह लिवर मे फ़ैट को जमने से भी रोकता है| इस तरह मसालों को भुनाने से जहाँ खाना स्वादिष्ट बनता है वहीं स्वास्थ्य को भी लाभ पहुँचाता है| अब हम समझ सकतें हैं कि भोजन पकाने की परंपरागत भारतीय पद्धिति कितनी सुरक्षित है|

खाना पकाने के कई और भी कारण हैं | भोज्य पदार्थों मे कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिनमें काफ़ी पौष्टिक अंश होते हैं लेकिन इन्हे पचाना आसान नहीं होता | ये तत्व सोयाबीन, राजमा, मटर और अंडे की सफेदी मे पाए जातें हैं| पाचन क्रिया में बाधक ये तत्व पकाने से नष्ट हो जातें हैं| यदि आपको लगता है की कच्चा अंडा शक्तिवर्धक है तो आपको जान लेना चाहिए की उससे न केवल सेलोमोनेला संक्रमण हो सकता है बल्कि आपके शशीर मे कुछ ऐसे तत्व प्रवेश कर सकतें हैं जिससे छोटी आँत मे पचने की प्रकिया धीमी पड़ सकती है| अंडे की सफेदी मे अवाइडिन नामक एक अन्य तत्व पाया जाता है, कच्चा अंडा खाने से यह तत्व पाचन नली मे विटामिन बी को पचाने मे रुकावट डालता है, लेकिन सामान्य तापमान पर पकाने से यह नष्ट हो जाता है|

कच्चे केकड़े और झींगा मे थियामानेज पाया जाता है, जो विटामिन बी समूह के विटामिन को पचने मे निष्क्रिय बना देता है| इसी प्रकार गॅस्ट्रोजन एक ऐसा तत्व समूह है जो तायरायड ग्रंथि को आयोडीन सोखने की शक्ति मे अवरोध पैदा कर सकता है, परंतु भोजन पकाने के दौरान ये तत्व नष्ट हो जातें हैं जिससे हमें कोई नुकसान नहीं होता है|

अब यह स्पस्ट है कि हम खाना भले ही अपने स्वाद के लिए पकाते हैं लेकिन इसके अनेक फ़ायदे हैं| इसका मतलब यह नहीं है की सभी भोजन पकाने चाहिए, भोजन मे कुछ विटामिन और खनिज इतने क्षीण होते हैं की उनको धोने,काटने और धोने मे वो नष्ट हो जातें हैं| इसलिए कम से कम भोजन के साथ एक फल और सलाद का सेवन ज़रूरी है ताकि शशीर मे पोशक तत्वों का संतुलन बना रहे|

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