नीम के प्रयोग से पाएँ आरोग्य

नीम ऐसा वृक्ष है जिसकी छाया में बैठना – सोना बहुत लाभकारी होता है| इस वृक्ष की पत्तियाँ तथा फल में मागोशील नामक कड़वे पदार्थ के अलावा निंबडिंन, नीबोस्तोरोल, टेनिन गंध और सोडियम मार्बोसेट नामक लवण पाया जाता है| प्रस्तुत है इसके औषधि प्रयोग –

नीम की कोपल , सोंठ , काला नमक, अजवाइन, संभाग लेकर नियमित सेवन करने से काया आजीवन निरोगी रहती है| साथ ही ज़हरीली गॅस और जहर का प्रभाव नहीं पढ़ता है|

नीम की अंतरछाल का मेथी दाना के साथ काढ़ा बना कर पीने से मधुमेह तथा प्रमेह से मुक्ति मिलती है और शरीर निरोगी रहता है|

नीम के अंतरछाल के साथ पीप्पली, सोंठ तथा काली मिर्च के सेवन से स्वास, कान्स दूर होती है| इसके साथ अद्रक का रस और शहद का भी सेवन करने से श्वास रोगी को होने वाले लाभ का वर्णन नहीं किया जा सकता|

नीम के बीज एवं कोंपल पीस कर तुलसी पत्र, अजवाइन तथा काली मिर्च के साथ सेवन करने वेल को गेस एवं उदर दोष से मुक्ति मिल जाती है|

नीम के दो बीज, संभाग सोंठ, आद्रक रस और शहद के साथ लेने से स्लेष्मिक जवर (स्नॉफिलिया) में अत्यंत लाभ होता है|

यदि स्नोवफिलिया अत्यंत कष्टसाध्या हो और नाक से पानी भी बहता हो तो समीर पन्नग रस के साथ टंकण भस्म और नीम की जड़ का सेवन इस रोग को दूर कर देता है|

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