पत्ता गोभी खाइए – सेहत बनाइए

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पत्तागोभी सामान्य सब्जी मानी जाती है जबकि वास्तविकता यह है की इसके पत्ते- पत्ते में बेशुमार गुण भरे हुए हैं| वजन घटाने के इक्च्छुक लोगों के लिए यह वरदान साबित हुई है| दिन में एक बार पत्ता गोभी का सलाद खाइए और स्लिम बने रहिए | हाल ही में इसमें एक नये अवयव टार्टरॉनिक अम्ल की खोज की गयी है, जिसने सोन्दर्य के प्रति जागरूक रहने वाले लोगों में तहलका मचा दिया है |

डाइटिंग करने का इससे आसान तरीका और क्या हो सकता है | पत्तागोभी की सौ ग्राम मात्रा से केवल ३० केलोरी ही मिलती है जबकि १०० ग्राम गेंहू से बनी रोटी से २४० किलो केलोरी मिलती है | पत्तागोभी में केलोरी की न्यूनतम मात्रा के साथ अधिक मात्रा में पोशाक तत्‍व मिले हुए हैं| डायटिंग करने वाले व्यक्ति के लिए यह आदर्श भोजन हो सकता है क्यूकी पत्तागोभी खाने के बाद व्यक्ति को अपना पेट भरा हुआ लगता ही है, साथ ही यह भोजन के पाचन के लिए अनुकूल स्तिथि भी उत्पन्न करती है|

बीमार लोग भी पत्तागोभी का लाभ उठा सकते है| ५० के दशक मे चिकित्सकों ने यह सिद्ध कर दिया था की ताजी पत्तागोभी का रस पेट व ग्रहणी के अल्सर के उपचार मे सहायता देता है| साथ ही पेट के वायु संबंधी विकारों को दूर करने मे भी मदद मिलती है| वैज्ञानिकों ने ताज़ा पत्तागोभी में एक अल्सर प्रतिरोधी कारक की खोज की है जिसे विटामिन “यू” भी कहा जाता है| यह अक्षर यू लेटिन भाषा के शब्द यूलॅस से लिया गया है जिसका अर्थ होता है अल्सर |

पत्तागोभी मे उपस्थित सलूलोज़ मानव स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से हितकारी हैं| सलूलोज़ का पहला गुण है की ये कलिस्ट्रॉल को हटाता है| इस प्रकार से धमनी कथिन्यहोने से बचाता है, दूसरा यह कार्बोहाइड्रेट का उपापचयन नहीं होने देता है| इस प्रकार पत्तागोभी मधुमेह से पीड़ित लोगों के भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए| पत्तागोभी के पत्ते अनिमिया से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से गुणकारी हैं क्यूकी इनमें विटामिन की बहुत अधिक मात्रा पाई जाती है|

पत्तागोभी में कई जीवाणु प्रतिरोधी पदार्थ भी होते हैं जीके बारे में अभी तक जानकारी नही हो पाई है| प्राचीन काल मे ताज़ा पत्तागोभी के पत्तो का उपयोग रुस की लोक औषधियों में भी किया जाता था| इनका उपयोग चोट, जलने और सर्दी में फटी त्वचा के उपचार में किया जाता था| पत्तागोभी की पत्तियों से सब्जी के गूदे के साथ कच्चे अंडे की जर्दी मिलाकर मरहम बनाए जाते थे| पत्तागोभी के रस में उबला हुआ जल मिलाकर उसे तनु बनाया जाता था और उसे गरारे में प्रयोग किया जाता था| केश वृधि के लिए पत्तागोभी के रस में मालिश की जाती थी| इसके पत्तो के गूदे का उपयोग जोड़ों और टूटी हुई हड्डी के उपचार मे किया जाता था|

पत्तागोभी काट कर उसमे नमक लगाकर जर्मन पद्धति से खट्टा होने दिया जाता है, इस प्रकार तैयार खट्टे गोभी को सोर क्राउट कहा जाता है| इस सोर क्राउट में विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं| पत्तागोभी से बयाए गये लवण जल के अपने क्रिया औषधि गुण होते हैं| चिकित्सक पाचन क्रिया उद्दीपक और भूख बढ़ाने के टॉनिक के रूप में इसकी सलाह देते हैं|

कई वैज्ञानिकों का विश्वास है की नमक लगाकर खट्टी की गयी पत्तागोभी गढिया और उच्च रक्तचाप जैसे कई रोगों का उपचार कर सकती है| खट्टी गोभी आँतो के सुचारू रूप से कार्य ना करने की स्थिति मे गुर्दे संबंधी विकारों का निदान भी कर सकती है|

हृदय रोंगों के उपचार में भी सोर क्राउट का उपयोग किया जाता है| लेकिन उपयोग से पूर्व इसके लवण की अतिरिक्त मात्रा को अच्छी तरह धोकर हटा देना चाहिए| इस प्रकार पेट और आँतो के अल्सर, उदर,वायु, यकृत दोषों से पीड़ित के लिए सोर क्राउट वरदान है|

ऐसा माना जाता है की पत्तागोभी को इसका अँग्रेज़ी नाम प्राचीन रोम में दिया गया| कैवेज लेटिन भाषा के शब्द “केपूत” से बना है जिसका अर्थ है – “प्रमुख” | वैज्ञानिकों ने यह अब प्रमाणित कर दिया है कि पत्तागोभी रेशेदार तत्वो व विटामिनों ख़ासतौर पर विटामिन सी से भरपूर होती है|

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