घरेलू उपचार

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नींबू के प्रयोग :
१. उल्टिीयों में – नींबू के रस मे सफेद जीरा, भूनी हींग और पिसी काली मिर्च चुटकी चुटकी मिलाकर फिर जल मिलाकर पी जाएँ|

२. त्वचा रोग में – खुजली वाली जगह पर नींबू के रस में २ – ३ पिसी काली मिर्च और थोड़ी मुलतानी मिट्टी मिलकर लगाएँ तथा ४५ मिनिट्स बाद स्नान करें |

३. अफारा में – पीठ में अफारा होने पर एक ताज़ी नींबू को काट कर उसकी २ फाँक कर लें, एक फाँक पर तोड़ा सेंधा नमक , पिसी काली मिर्च बुरख कर धीमी अग्नि पर थोड़ा पकाने के बाद चूसें | इससे मुँह का बेज़ाएकापन दूर होकर अफारा दूर होगा | भूख बढ़ेगी साथ ही पेट के अन्य रोग भी दूर होंगें|

४. सिर दर्द में – चाय में दूध के स्थान पर नींबू निचोड़ कर पीने से सिर दर्द दूर होता है|

५. मुख की दुर्गंध दूर करने मे – नींबू के रस से दुगुना गुलाब जल मिलाकर गरारा करें| यदि कब्ज की वजह से मुख से दुर्गंध आती है तो कब्ज दूर करें|

नीम के उपयोग :
१. त्वचा रोगों में – त्वचा रोगों मे नींम का प्रयोग श्रेष्ट रहता है| श्वेत कुसत मे नीम के फूल तथा पत्तियाँ बराबर-बराबर मात्रा में लेकर सिल पर महीन पीस कर पानी मिलाकर, पहले दिन दो माशा पिएं, बाद मे प्रतिदिन थोड़ा थोड़ा बढ़ाते हुए ६ माशा तक ले जाएँ| यह प्रयोग ४० दिन तक करें, दाद मे नीम के पत्तो को दही मे पीस कर लेप करें|

२. फोड़े में – बहने वाले फोड़े पर नीम की छाल की भस्म लगाएँ|

३. दमा में – नीम के बीज का तेल ३०-३० बूँद नित्य पानी में डालकर खाने से दमा में फायदा पहुँचता है|

४. बवासीर में – नीम की निम्बोली और एलुआ को बराबर की मात्रा में लेकर पीस मिलकर ६ माशे की मात्रा मे नित्य एक बार खाते रहें|

५. पेट में कीड़े होने पर – सब्जी के साथ नीम की पत्ती का छौंक लगा कर खाएँ|

६. संतति निरोध में – सहवास पूर्व नीम के तेल मे रूई का फ़ाहा डुबोकर योनि मे रखने से शुक्राणु मर जाते हैं और और इस तरह गर्भ धारण नहीं हो पाता|

पुदीने के उपयोग :

१. मुहाँसे होने पर पुदीने के पत्तों का रस लगाएँ|

२. पुदीने का शत्र तीन मासा में यथा आवश्यक अजवाइन और पीपेरमिंट मिला कर घोल तैयार करें| इस घोल की तीन चार बूंदे ठंडे जल में डाल कर पीने से पेट का अफारा, वायु विकार में लाभ होगा|

३. भोजन के साथ पुदीने की चटनी में थोड़ा गुड मिलाकर खाएँ| खाया पिया शीघ्र हजम होगा|

४. उल्टी दस्त होने पर पुदीने के रस मे प्याज़ और नींबू का रस मिलाकर पिलाने से लाभ होता है |

५. पुदीने की पत्त्यों को जल मे उबालें, इस जल से कुल्ला करने से मुख की दुर्गंध मिटती है |

६. मधुमक्खी, बिच्छू के काटने पर पुदीना की पत्तियाँ पीस कर काटे स्थान पर मलें|

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