स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक है चाय :

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चाय पीने से लाभ हो या न हो, लेकिन सभी स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस तथ्य पर एक मत हैं कि चाय लाभ के अनुपात में दोगुनी हानिकारक होती है । रात की खुमारी तोड़ने वाली सुबह की चाय केवल सुबह ही नहीं बल्कि दिन में पांच बार सहज रूप से पी जाती है | आगंतुक का स्वागत हो या शादी-विवाह का औपचारिक शिष्टाचार, सभी चाय बिना सूने हैं । स्वास्थ्यनाशक चाय शिष्टाचार से कुछ इस कदर जुड़ गई है कि चाय न पीना पिलाना अनिष्ट समझा जाने लगा है |

चाय में पाये जाने वाले तीन तत्व टेनिन, कैफ़ीन (थीनन) तथा यूरिक एसिड शरीर पर विपरीप प्रभाव डालते हैं । टैनिक एसिड जहां पाचन क्रिया को शिथिल करता है वही कैफ़ीन (थीनन) उत्तेजक होने के कारण खून का दौरा तीव्र करके नींद तथा थकान को तोड़ता है | चाय के एक कप में लगभग एक ग्रेन कैफ़ीन पाई जाती है । यदि कोई व्यक्ति चार-पांच कप चाय दिन में पीता है तो प्रतिदिन 4-6 ग्राम की मात्रा में कैफ़ीन नामक जहर उसके पेट में पहुँच जाता है | इससे जल्दी ही यह व्यक्ति नाड़ी दुर्बलता, भूख न लगना, कंपकपी महसूस करना तथा इंद्रियों के निष्क्रिय हो जाने जैसी स्वास्थ्य दुर्बलता का शिकार हो जाता है |

चाय में पाए जाने वाले उत्प्रेरक तत्व मानव मस्तिष्क के ज्ञानतंतुओँ पर प्रतिकूल प्रभाव डालकर इंद्रियों को सुप्तप्राय कर देते हैं । चाय का कैफ़ीन तत्व नींद को कम करता है, फलत: समुचित नींद के अभाव में दिमागी रोगों का जन्म होता है । टैनिन तत्व के प्रभाव से आमाशय एवं आतो के कार्यं पर विपरीप प्रभाव पड़ता है । टैनिन तत्व की परत आमाशय में जम जाने पर आमाशय में होने वाले पाचक रसों का स्राव बंद हो जाता है |

चाय में थोड़ी मात्रा में विटामिन  ‘बी’  तथा प्रोटीन पाया जाता है । इन दोनों तत्वों की मात्रा इतनी कम होती है कि ये तत्व अपना अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ पाते । त्वचा में खुश्की आना तथा त्वचा का सक्थ होना चाय का दुष्परिणाम है

चाय का नियमित प्रयोग करने वाले चाय को अधिक विषैला बनाते हैं | चाय पत्ती को एक डेढ़ मिनिट से अधिक उबालने पर उसमें टेनिन की मात्रा प्रति उबाल के साथ बढ़ती जाती है | इसलिए स्वस्थ्य विशेश्ग्य घर की बनी चाय की तुलना में होटल की वनी चाय को अधिक विषाक्त मानते हैं |

सुबह-सुबह खाली पेट चाय पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है । चाय के साथ हल्का फुल्का नाश्ता अवश्य लेना चाहिए | चाय में दूध की मात्रा अधिक तथा चाय पत्ती की मात्रा कम करके भी चाय के विषेलेपन को कम किया जा सकता है । अनिद्रा, यक त रोगी, वायु के रोगी, अम्लपित्त रोगी तथा पाचन रोग से संबंधित रोगियों को चाय का सेवन नहीं करना चाहिए |

चाय से रक्तक्षीणता बढ़ती है । यक त कमजोर होता है तथा यह वीर्य को पतला करती है । गठिया रोग से पीढ़ित व्यक्तियों के लिए भी चाय हानिकारक होती है, क्योंकि चाय से पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ता है, जिससे जोडों पर सूजन आ जाती है चाय के दुष्प्रभाव से बचने के लिए घर बाहर यथासंभव चाय नहीं पीनी चाहिए।

यदि किसी का विशेष ही आग्रह हो तो आधे कप से अधिक चाय कदापि न लें | चाय क साथ बिस्कुट या नमकीन इत्यादि कुछ हल्का खाद्य पदार्थ अवश्य लें ।

चाय की आदत छोड़ने के लिए जरूरी है कि आप स्वयं तो चाय कम पीएं, साथ ही दूसरों को चाय पीने का अति आग्रह ना करें | यदि शिष्टाचारवश आगंतुक को कुछ देना जरूरी ही हो तो लस्सी, शर्बत, शिकंजी या गरम दूध पीने दें इससे आपका स्वास्थ्य तो ठीक रहेगा ही , उपने मित्र एवं रिश्तेदारों के स्वास्थ्य की रक्षा भी आप सहजता से कर सकेंगे । यदि चाय की आदत छोड़ना संभव न हो तो चाय की मात्रा कम करने के प्रति जागरूक रहना जरूरी है | यदि चाय की लत छोड़ना चाहें तो धीरे- धीरे चाय पत्ती की मात्रा कम लेते हुए दूध की मात्रा बढ़ाते जाना चाहिए |

चाय पीने से कोई लाभ नहीं है बल्कि कई गुना अधिक हानियाँ है |

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